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सुरभि ( सुरभी )

  • (१) कामधेनु नामक गौ । इनका जन्म दक्ष प्रजापतिके सुरभि-गन्धयुक्त श्वाससे हुआ था ( आदि० ६६ । २६ के बाद दाक्षिणात्य पाठ ) ।
  • इन्हें दक्षकी कन्या माना गया है । देवी सुरभिने कश्यपजीके सहवासमें एक गौको जन्म दिया, जिसका नाम नन्दिनी था । महर्षि वसिष्ठने नन्दिनीको अपनी होमधेनुके रूपमें प्राप्त किया था ( आदि० ७१ । ८-९ ) ।
  • ये ब्रह्माजीकी सभामें रहकर उनकी उपासना करती हैं ( सभा० ११ । ४० ) ।
  • इनका अपने पुत्र बैलके लिये इन्द्रसे दुःख प्रकट करना ( वन० ९ । ९-१४ ) ।
  • नारद-जीद्वारा मातलिसे इनकी तथा इनकी संतानोंका वर्णन ( उद्योग० १०२ अध्याय ) ।
  • इनके दिव्य स्वरूपका तथा प्रजापतिके सुरभि-गन्धयुक्त श्वाससे इनकी उत्पत्तिका वर्णन ( अनु० ७७ । १० ) ।
  • इनकी तपस्या और ब्रह्माजीसे इन्हें अमरत्व एवं गोलोकमें निवासकी प्राप्ति ( अनु० ८३ । २९-३५ ) ।
  • इनके निवासभूत गोलोककी दिव्यता-का वर्णन ( अनु० ८३ । ३०-४४ ) ।
  • इनका कार्तिकेय-को एक लाख गौओंकी भेंट देना ( अनु० ८६ । २३ ) ।
  • अगस्त्यजीके कमलोंकी चोरी होनेपर इनका शपथ खाना ( अनु० ९४ । ४१ ) ।
  • (२) क्रोधवशाकी क्रोधजनित कन्या, नाग तथा पन्नग जातिके सर्पोंकी माता । इनकी तीन पुत्रियाँ थीं, जिनके नाम इस प्रकार हैं—अनला, रुहा एवं वीरूधा ( आदि० ६६ । ६१, ६७ ) ।
  • ये ब्रह्माजीकी सभामें उपस्थित होकर उनकी उपासना करती हैं ( सभा० ११ । ३९ ) ।
  • (३) एक अप्सरा, जिसने अर्जुनके जन्म-महोत्सवमें नृत्य किया था ( आदि० १२२ । ६३ ) ।

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