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सुशर्मा

  • ( १ ) वृहत्क्षेमका पुत्र एवं त्रिगर्तदेशका राजा, जो द्रौपदीके स्वयंवरमें गया था ( आदि० १८५ । ९ ) ।
  • इसका दुर्योधनको मत्स्यदेशपर आक्रमण करनेकी सलाह देना ( विराट० ३० । ९-१३ ) ।
  • इसके द्वारा विराट-नगरपर चढ़ाई ( विराट० ३० । २४ ) ।
  • गोहरणके समय इसका युद्ध राजा विराटको बंदी बनाना ( विराट० ३३ । ७-९ ) ।
  • भीमसेनद्वारा जी-ते-जी इसका पकड़ा जाना ( विराट० ३३ । २४-४८ ) ।
  • युधिष्ठिरकी कृपासे इसका ( दाम्भावसे ) छुटकारा ( विराट० ३३ । ५८-६१ ) ।
  • पाण्डवोंकी ओरसे इसे रणनिमन्त्रण भेजनेका निश्चय किया गया था ( उद्योग० ४ । २० ) ।
  • प्रथम दिनके संग्राममें चेकितानके साथ इसका द्वन्द्वयुद्ध ( भीष्म० ४५ । ६०-६२ ) ।
  • अर्जुनद्वारा पराजित होकर युद्धसे हट जाना ( भीष्म० ८२ । ९ ) ।
  • अर्जुनके साथ युद्ध ( भीष्म० ८४ । ५३; भीष्म० १०२ । १०-१८ ) ।
  • अर्जुन और भीमसेनके साथ युद्ध ( भीष्म० ११४ अध्याय ) ।
  • धृष्टद्युम्नके साथ युद्ध ( द्रोण० १० । ३०-३१ ) ।
  • अर्जुनको मारनेके लिये भाइयों और संशप्तक-सेनासहित इसका शपथ खाना ( द्रोण० १० । २९-३६ ) ।
  • द्रोणाचार्यके मारे जानेपर युद्धस्थलसे भागना ( द्रोण० १९३ । १८ ) ।
  • अर्जुनके साथ युद्ध करते समय संशप्तकों-द्वारा इसका अर्जुनको रथ और सारथिसहित पकड़वा लेना ( कर्ण० ५३ । १३-१६ ) ।
  • अर्जुनद्वारा इसका मारा जाना ( शल्य० २७ । ४६ ) ।
  • ( २ ) पाण्डवपक्षका एक पाञ्चालयोद्धा । चित्रसेनके साथ इसका द्वन्द्वयुद्ध ( भीष्म० ११६ । २०-२१ ) ।
  • इसका भीमद्वारा पीड़ित होना तथा अर्जुनद्वारा इसकी रक्षा ( भीष्म० ११७ । ३९-४२ ) ।
  • कर्णके साथ इसका युद्ध और उसके द्वारा वध ( कर्ण० ५६ । ४४-४८ ) ।

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