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सुषेण

  • ( १ ) धृतराष्ट्रके कुलमें उत्पन्न एक नाग, जो जनमेजयके सर्पसत्रमें दग्ध हो गया था ( आदि० ५७ । १० ) ।
  • ( २ ) धृतराष्ट्रके सौ पुत्रोंमेंसे एक ( आदि० १०७ । १६; आदि० ११७ । ७ ) ।
  • भीमसेनद्वारा इसका वध ( भीष्म० ६४ । ३४; द्रोण० १२७ । ६० ) ।
  • ( धृतराष्ट्रपुत्र ‘सुषेण’ का वध दो स्थलोंमें आया है; अतः अनुमान होता है कि उनके दो पुत्र इस एक ही नामसे प्रसिद्ध थे । उनका पृथक्-पृथक् और भी नाम रहा होगा; पर उस नामसे उनकी प्रसिद्धि नहीं थी । )
  • ( ३ ) पुरुवंशीय महाराज अविक्षित्के पौत्र एवं परीक्षित्-पुत्र । माता रेणुका । मातृ-वधकी आज्ञा न माननेसे इन्हें पिताका शाप ( वन० ११६ । १२ ) ।
  • परशुराम-द्वारा शापसे इनका उद्धार ( वन० ११६ । १७ ) ।
  • ( ४ ) वानरराज वालिके श्वसुर । ताराके पिता । इनका सहस्र कोटि ( दस अरब ) वानर-सेनाके साथ श्रीरामके पास उपस्थित होना ( वन० २८३ । १२ ) ।
  • ( ५ ) कर्ण-का पुत्र तथा चक्ररक्षक । नकुलके साथ इसका युद्ध ( कर्ण० ४८ । १८, ३४-४० ) ।
  • उत्तमौजाद्वारा इसका वध ( कर्ण० ७५ । १३ ) ।
  • ( ६ ) कर्णका पुत्र । नकुलद्वारा इसका वध ( शल्य० १० । ४९-५० ) ।
  • ( कर्णपुत्र ‘सुषेण’का वध दो स्थानोंपर आया है; अतः यह अनुमान होता है कि कर्णके दो पुत्र इसी नामसे प्रसिद्ध थे । )

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