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सुहोत्र

  • (१) एक प्राचीन नरेश ( आदि० ९१ । २२६ ) ।
  • ये सम्राट् भरतके पौत्र एवं सुमन्‍युके ज्येष्ठ पुत्र थे । इनकी माताका नाम 'पुष्करिणी' था ( आदि० ९४ । २४ ) ।
  • इन्हें ही भूमण्डलका राज्य प्राप्त हुआ और इन्होंने राजसूय तथा अश्वमेध आदि अनेक यज्ञ किये थे । इनके राज्यकी विशेषता ( आदि० ९४ । २५—२९ ) ।
  • इनके द्वारा इक्ष्वाकुकुलनन्दिनी सुवर्णाके गर्भसे अजमीढ़, सुमीढ़ तथा पुरुमीढ़की उत्पत्ति ( आदि० ९४ । ३० ) ।
  • इनकी दानशीलता और पराक्रम आदि गुणोंका विशेष वर्णन ( द्रोण० ५६ अध्याय ) ।
  • ये अतिसत्कारके प्रेमी थे । इनके राज्यमें इन्द्रने एक वर्षतक सुवर्णकी वर्षा की थी । नदियाँ अपने जलके साथ सुवर्ण बहाया करती थीं । इन्द्रने बहुतसे सोनेके कछुए, केकड़े, नाकें, मगर और सूँस आदि उन नदियोंमें गिराये थे । राजाने सारी सुवर्ण-राशि ब्राह्मणोंमें बाँट दी थी ( शान्ति० २९ । २५—२९ ) ।
  • (२) मदराज द्युतिमान्की पुत्री विजयाके गर्भसे पाण्डुकुमार सहदेवद्वारा उत्पन्न ( आदि० ९५ । ८० ) ।
  • (३) एक ऋषि, जो अजातशत्रु युधिष्ठिरका आदर करते थे ( वन० २६ । २४ ) ।
  • (४) एक कुरुवंशी नरेश । इनका राजा उशीनरवंशी शिविके मार्गको रोकना । नारदजीके कहनेपर इनका शिविको मार्ग देना ( वन० १९४ । ३, ७ ) ।
  • (५) एक राक्षस, जो प्राचीनकालमें इस भूतलका शासक था, परंतु कालवश इसे छोड़कर चल बसा ( शान्ति० २२७ । ५१ ) ।

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