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सोमदत्त

  • कुरुवंशी महाराज प्रतीपके पौत्र एवं बाह्लीकके पुत्र । इनके भूरि, भूरिश्रवा तथा शल नामके तीन पुत्र थे । ये अपने तीनों पुत्रोंके साथ द्रौपदीके स्वयंवरमें पधारे थे ( आदि० १८५ । १४-१५ ) ।
  • युधिष्ठिरके राजसूय यज्ञमें भी इनका शुभागमन हुआ था ( सभा० ३४ । ८ ) ।
  • देवकीके स्वयंवरके समय शिनि इनके साथ बाहुयुद्ध तथा शिनिका इन्हें पटककर लात मारना एवं इनकी चुटिया पकड़ना ( द्रोण० १४४ । ११-१३ ) ।
  • शिनिके छोड़ देनेपर इनकी तपस्या और बदला लेनेके लिये वर एवं पुत्रकी प्राप्ति ( द्रोण० १४४ । १५-१९ ) ।
  • सात्यकि के साथ युद्धमें इनका पराजित होना ( द्रोण० १५६ । २१-२९ ) ।
  • सात्यकि एवं भीमसेनके प्रहारसे मूर्च्छित होना ( द्रोण० १५७ । १०-११ ) ।
  • सात्यकि द्वारा इनका वध ( द्रोण० १६२ । ३३ ) ।
  • इनके शरीरका दाह-संस्कार ( स्त्री० २६ । ३३ ) ।
  • धृतराष्ट्र द्वारा इनका श्राद्ध ( आश्रम० ११ । १७ ) ।
  • व्यासजीके आवाहन करनेपर कुरुक्षेत्रमें मरे हुए कौरव वीरोंके साथ ये भी गङ्गाजलमें प्रकट हुए थे ( आश्रम० ३३ । १२ ) ।

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