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अङ्गद -

  • (१) वानरराज वालीके पुत्र (वन० ८२।२८)।
  • वालीकी पत्नी तारा इनकी माता थी (वन० २८०। १८)।
  • इनका सीताजीको खोजने लौटकर मधुबनके फल खाना (वन० २८२।२७-२८)।
  • श्रीरामका इन्हें दूत बनाकर रावणके दरबारमें भेजना (वन० २८३। १४)।
  • लङ्कामें जाकर रावणको श्रीरामका संदेश सुनाना (वन० २८४।१०-१६)।
  • अङ्गदका इन्द्रजित्के साथ घोर युद्ध इनका (वन० २८८।१४-१९)।
  • अङ्गदका साथियोंसहित आगे बढ़कर रावण और उसकी सेनापर आक्रमण (वन० २९०।३-४)।
  • श्रीरामके द्वारा किष्किन्धाके युवराजपदपर इनका अभिषेक (वन० २९१।५९)।
  • (२) कौरवपक्षका एक वीर योद्धा, जो बारहवें दिनके युद्धमें उत्तमौजासे लड़ा था (द्रोण० २५।३८-३९)।
  • (३) एक आभूषणका नाम, जो बाँहोंमें पहना जाता है ।

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