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हनुमान्

  • ( केसरीकी पत्नी अञ्जना देवीके गर्भमें वायुद्वारा उत्पन्न महावीर मारुति ) इनका कदलीवनमें भीमसेनका मार्ग रोककर लेटना ( वन० १४६ । ६६-६७ ) ।
  • इनका भीमसेनके साथ संवाद ( वन० १४७ अध्याय से १४० तक ) ।
  • इनका भीमसेनको श्रीराम-चरित्र सुनाना ( वन० १४८ अध्याय ) ।
  • इनके द्वारा चारों युगोंके धर्मका वर्णन ( वन० १४९ अध्याय ) ।
  • इनका भीमसेनको अपना विशाल रूप दिखाना ( वन० १५० । ३-४ ) ।
  • इनके द्वारा चारों वर्णोंके धर्मका प्रतिपादन ( वन० १५० । ३०-३६ ) ।
  • इनके द्वारा राजधर्मका प्रतिपादन ( वन० १५० । ३७-४१ ) ।
  • इनका भीमसेनके सिंहनादको अपनी गर्जनामें बढ़ाने तथा अर्जुनकी ध्वजापर स्थित होकर अपनी भीषण गर्जनाद्वारा शत्रुओंको डरानेकी बात कहकर भीमसेनको आश्वासन दे अन्तर्धान होना ( वन० १५१ । १६-१९ ) ।
  • इनका लंकामें लौटकर श्रीरामसे सीताका समाचार बताना ( वन० २८२ । १०-५० ) ।
  • इनके द्वारा धूमाक्षका वध ( वन० २८६ । १९ ) ।
  • इनका दूत बनकर भरतके पास जाना और लौटकर श्रीरामको इसकी सूचना देना ( वन० २९१ । ६१-६२ ) ।

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