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हरणाहरणपर्व

  • -आदिपर्वका एक अवान्तर पर्व ( अध्याय २२० ) ।
  • (१) रावणकी सेवामें रहनेवाले पिशाच तथा अधम राक्षसोंका एक दल, जिसने वानरोंकी सेनापर धावा किया था ( वन० २८५ । १९-२ ) ।
  • (२) यक्षोंमें एक यक्ष तथा यशस्वी वंशजोंमेंसे एक ( उद्योग० १०१ । १३ ) ।
  • (३) घोड़ोंका एक भेद; जिसके मुखके बड़े-बड़े बाल और शरीरके रोयें सुनहरे रंगके हों, जो रंगमें रेशमी पीताम्बरके समान जान पड़ता हो, वह घोड़ा हरि कहलाता है ( द्रोण० २३ । १३ ) ।
  • (४) राजा अकम्पनका पुत्र, जो बलमें भगवान् नारायणके समान, अस्त्रविद्यामें पारङ्गत, मेधावी, श्रीसम्पन्न तथा युद्धमें इन्द्रके तुल्य पराक्रमी था । यह युद्धक्षेत्रमें शत्रुओके हाथ मारा गया था ( द्रोण० ५२ । २०-२१ ) ।
  • इसकी मृत्युका वर्णन ( शान्ति० २५६ । १८ ) ।
  • (५) एक असुर, जो तारकाक्षका महाबली वीर पुत्र था । इसने तपस्याद्वारा ब्रह्माको प्रसन्न करके उनसे वरदान पाकर तीनों पुरोंमें मृतसंजीवनी प्रावलीका निर्माण किया था ( कर्ण० ३३ । २७-३० ) ।
  • (६) पाण्डवपक्षका एक योद्धा, जो कर्णद्वारा मारा गया था ( कर्ण० ५६ । ४९-५० ) ।
  • (७) स्कन्दका एक सैनिक ( शल्य० ४५ । ६१ ) ।
  • (८) श्रीकृष्णका एक नाम तथा इस नामकी निरुक्ति ( शान्ति० ३४२ । ६८ ) ।

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