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इला –

  • (१) वैवस्वत मनुकी पुत्री, पुरुषरूपमें परिणत होनेपर इनका नाम सुद्युम्न हुआ (आदि० ७५ । १६; अनु० १ ९४ । २६)।
  • ये दो बार अपने जीवनमें स्त्री होकर पुरुष हुए थे। पहले तो इन्होंने होताओंके दोषसे कन्या होकर ही जन्म लिया था। बादमें वसिष्ठजी की कृपासे पुरुष हुए और दुबारा इलावृतखण्डमें जाकर महादेवजीके शापसे स्त्री हुए थे। यह कथा श्रीमद्भागवत- के नवम स्कन्धमें देखना चाहिये]। इनके गर्भसे पुरुरवाका जन्म हुआ (फिर ये पुरुष हो गये)। अतः पुरूरवाके पिता और माता दोनों कहे जाते हैं (आदि० ७५ । १८-१९)।
  • इला बुधकी पत्नी और पुरुरवाकी माता थी (अनु० १५० । २७)।
  • (२) एक नदी, जिसने कार्तिकेयको फल-फूलकी भेंट अर्पित की थी (अनु० ८६ । २४)।
  • इस नदी सम्बन्धी तीर्थमें युधिष्ठिरने ब्राह्मणोंसहित स्नान किया था (वन० १५६ । ८)।

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