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उग्रसेन -

  • (१) महाराज जनमेजयका एक भाई, जिसने अपने अन्य दो भाइयोंके साथ सरमा-पुत्रोंको मारा था (आदि० ३।१-२)।
  • (२) ‘मुनि'नामवालो कश्यपकी पत्नीका एक देवगन्धर्व (आदि० ६५।४२)।
  • यह अर्जुनका जन्मोत्सव देखने गया था (आदि०१२२। ५५)।
  • विराट्नगरमें अर्जुन और कृपाचार्यका युद्ध देखनेके लिये भी इसने पदार्पण किया था (विरा० ५६। ११-१२)।
  • (३) एक राजा, जो ‘स्वर्भानु’ नामक असुरके अंशसे प्रकट हुआ था (आदि०६७।१२-१३)।
  • (४) (चित्रसेन) धृतराष्ट्रका एक पुत्र (आदि० ६७।१००)।
  • भीमसेनद्वारा इसका वध (द्रोण० १५७।२९-३०)।
  • (५) ये वृष्णिवंशके प्रतापी राजा और राजा कुन्तिभोजके फुफेरे भाई थे (आदि० ६७। १३०; २१६।८)।
  • राजा उग्रसेनका दूसरा नाम आहुक था (उद्योग० १२८। ३८-३९; अनु० १४।४१)।
  • इनके मन्त्री वसुदेव थे और पुत्र बलवान् कंस; कंस अपने पिता उग्रसेनको कैद करके मन्त्रियोंके साथ इनका राज्य भोगने लगा (सभा० २२।३६ के बाद दक्षिणात्य पाठ,)।
  • उग्रसेन- की सम्मतिसे श्रीकृष्णने भाइयोंसहित कंसको मारकर पुनः उग्रसेनको ही मथुराके राज्यपर अभिषिक्त किया (सभा०)।
  • उग्रसेन और वृष्णिवंशको जरासंधसे सदा क्लेश प्राप्त होता था (सभा० पृष्ठ ७३२)।
  • शाल्वके चढा़ई करनेपर उग्रसेनके द्वारा नगरकी सुरक्षा (वन० १५।२३)।
  • श्रीकृष्णने नारदजीकी पूज्यताके विषयमें प्रश्न (शान्ति० २३०।३)।
  • साम्बके पेटसे पैदा हुआ मुसल उग्रसेनको दिया गया, उग्र देखकर ये दुखी हुए और उसे कुटवाकर चूर्ण बनवाकर इन्होंने समुद्रमें फेंकवा दिया, फिर मद्यनिषेधकी आज्ञा जारी की (मौसल० १।२९-३०)।
  • उग्रसेन मृत्युके पश्चात् विरवेदेवोंमें मिल गये थे (स्वर्ग० ५।१०-१८)।
  • (६) सोम- वंशीय राजा अविषिक्तके चौथे तथा परीक्षित्के पुत्र (आदि० ९४।४२-५४)।

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