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उद्दालक-

  • एक ऋषि जो जनमेजयके सर्पसत्रके सदस्य थे ( आदि० ५३। ७)।
  • ये ही आयोदधौम्य ऋषिके शिष्य आरुणि पाञ्चाल हैं, जो आगे चलकर उद्दालक नामसे प्रसिद्ध हुए । ये इन्द्रकी सभामें भी उपस्थित होते थे ( सभा० ७।१२)।
  • उद्दालकके पुत्रका नाम श्वेतकेतु और कन्याका नाम सुजाता था । उद्दालकने अपनी कन्या सुजाताका विवाह प्रिय शिष्य कहोड़से किया था, जिसके गर्भसे अष्टावक्रका जन्म हुआ था ( वन० १३२। ९-९)।
  • उद्दालकने यज्ञमें उनके चिन्तन करनेपर सरस्वती नदीका प्राकट्य हुआ था, उस समय उनकी उस धाराका नाम 'मनोरमा' हुआ था ( शल्य० ३८। २२ - २५)।
  • इन्होंने अपने पुत्र श्वेतकेतुको ब्राह्मणोंके प्रति उसके कपटपूर्ण व्यवहारके कारण निकाल दिया था ( शान्ति० ५०।९०)।

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