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उर्वशी–

  • ( १ ) एक प्रसिद्ध सर्वश्रेष्ठ अप्सरा ( आदि० ७४ । १५८; वन० ४२ । २९ )।
  • उर्वशीके गर्भसे राजा पुरुखाद्वारा छः पुत्र उत्पन्न हुए–आयु, धीमान्, अमावसु, दृढाग्रु, वनायु और शतायु ( आदि० ७५ । २४-२५ )।
  • यह स्वर्गकी विख्यात ग्यारह अप्सराओमें ग्यारहवी है, जिसने अर्जुनके जन्मोत्सवपर गीत गाया था ( आदि० १२२।६६ )।
  • कुबेरकी सभा में नृत्य-गान करनेवाली अप्सराओमें यह भी है ( सभा० १० । ११ )।
  • इसकी अर्जुनके पास जानेके लिये चित्रसेनसे बात ( वन० ४५ । १६-१६ )।
  • इसका कामपीडित होकर अर्जुनके पास पहुँचना ( वन० ४६ । १६ )।
  • उर्वशीका अर्जुन-के निकट अपने आनेका कारण बताना और अपनी काम-विवशता प्रकट करना ( वन० ४६ । २२-३५ )।
  • स्वर्गकी अप्सराओंका किसीके साथ स्पर्श नहीं है, उनके साथ सम्पर्कसे दोष नहीं होता, ऐसा कहकर उर्वशीका अर्जुनसे समागमके लिये प्रार्थना करना ( वन० ४६ । ४२-४४ )।
  • कामनापूर्ति न होनेपर इसके द्वारा अर्जुनको शाप ( वन० ४६ । ४५-५० )।
  • शुक्रदेवजीकी परमपद-प्राप्तिके समय आश्चर्यचकित होना ( शान्ति० ३३२ । २१ - २४ )।
  • ( २ ) भगीरथके ऊपर बैठनेके कारण गङ्गाजीका एक नाम ( द्रोण० ६० । ६ )।

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