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उशीनर -

  • (१) एक वृष्णिवंशी एवं पराक्रमी राजकुमार, जो द्रौपदीके स्वयंवरमें गया था (आदि० १८४।२०)।
  • (२) शिविदेशके राजा, ये यम-सभाके सदस्य हैं (सभा० ८।१९)।
  • इनका वाजसूय इन्द्रको अग्निरूप कबूतर- की रक्षाके लिये अपना मांस काटकर देना (वन० १३०।२९ से १३१।२८ तक)।
  • इन्द्र और अग्निद्वारा राजाका अभिनन्दन (वन० १३१।३०- ३१)।
  • इनका स्वर्गगमन (वन० १३१।३२ - ३३)।
  • इनका गालवको शुक्लरूपमें दो सौ घोड़े देकर ययातिकन्या माधवीको स्वीकार करना (उद्योग० ११८।१५)।
  • इनको महाराज श्येनकके खड्गकी प्राप्ति (शान्ति० १६६। ७९)।
  • ये शरणागतवत्सल शिविके पिता थे। माधवीके गर्भसे शिवि नामक पुत्रकी प्राप्ति (उद्योग० ११६।२०)।
  • इन्हें गोदानसे स्वर्णकी प्राप्ति हुई (अनु० ७६।२५)।
  • (३) काशिराज वृषादर्मि, इनकी शरणागतताके प्रसंगमें कबूतर और व्याधकी कथा (अनु० ३२ अ०में)।
  • ये उशीनर और वृषादर्मि दोनों नामोंसे विख्यात थे और काशी जनपदके राजा थे (अनु० ३२।२२-३०)।
  • (४) एक देश, जहाँके निवासी सैनिक अर्जुनके द्वारा मारे गये थे (कर्ण० ५। ४०)।
  • इस देशके वीर सब प्रकारके अस्त्र-शस्त्रोंमें कुशल और बलशाली होते हैं (शान्ति० १०१।४)।
  • उशीनर देशके क्षत्रिय ब्राह्मणोंके कृपादृष्टिसे वञ्चित होनेके कारण शूद्र हो गये (अनु० ३२।२२-२३)।

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