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ऋचीक -

  • ( १ ) एक महर्षि, जो भृगुकुमार च्यवनके पुत्र थे ( वन० १८।४२ )।
  • ये ही कल्पान्तरमें ही और्वके पुत्र हुए, जो जमदग्निके पिता थे ( आदि० ६६।४५-४७ )।
  • इन्होंने शुल्करूपमें महाराज गाधिको देनेके लिये वरुणसे एक हजार अश्वोंकी याचना की थी ( वन० ११८। १६-२० )।
  • इनका सत्यवतीके साथ विवाह ( वन० ११९।१५ )।
  • इनका परशुरामको क्षत्रियोंके वधसे रोकना ( वन० ११०।१०; ब्रह्म० २२।३० )।
  • इनका वरुणसे माँगकर सत्यवतीके शुल्करूपमें गाधिको एक हजार श्यामकर्ण घोड़े देना ( उद्योग० १११। ५-६ )।
  • गाधिपुत्री सत्यवतीके साथ इनका विवाह ( शान्ति० ४९।७ )।
  • इनका पुनर्जन्मके लिये चर देना ( शान्ति० ४९।९ )।
  • माताके साथ चरके उलट-फेर हो जानेपर अपनी पत्नी सत्यवतीके साथ संवाद ( शान्ति० ४९।१८ - २८ )।
  • विश्वामित्रके जन्मप्रसंगमें पुनः इस कथाका वर्णन ( अनु० ४५ में )।
  • ऋचीकको शाल्वराज श्रुतिमानसे राज्यका दान प्राप्त हुआ था ( अनु० १३०।३३ )।
  • ( २ ) विवस्वान्के स्वरूभूत्त बारह सूर्योंमेंसे एक ( आदि० ९१।४२ )।
  • ( ३ ) सम्राट् भरतके पौत्र एवं सुदुम्नके पुत्र ( आदि० ९४।२४ )।

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