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कपिल

  • (१) भगवान् श्रीकृष्ण या विष्णुके पुरातन अवतार महर्षि कपिल, जिन्होंने दृष्टिपातमात्रसे सगर-पुत्रोंको भस्म कर दिया था (वन० ४७ । १८-१९; वन० १०७ । ३२-३३) ।
  • ये प्रजापति कर्दमके पुत्र हैं । इनकी माताका नाम देवहूति है । इनका दूसरा नाम 'चक्रधनु' है (उद्योग० १०१ । १७-१८) ।
  • शान्ति० ४३ अध्यायमें भी इनकी महिमाका उल्लेख हुआ है । बाणशैयापर गिरनेके समय भीष्मजीके पास आनेवाले महर्षियोंमें इनका भी नाम आया है (शान्ति० ४७ । ८) ।
  • इनका स्यूमश्मि ऋषिके साथ यज्ञ-विषयक संवाद (शान्ति० २६८ अध्याय) ।
  • प्रवृत्ति-निवृत्तिमार्गके विषयमें उन्हीं ऋषिके संवाद (शान्ति० २६९ अध्याय) ।
  • स्यूमश्मिसे ब्रह्म-प्राप्तिके सम्बन्धमें बातचीत (शान्ति० २७० अध्याय) ।
  • इनका शिव-महिमाके विषयमें युधिष्ठिरको अपना अनुभव बताना (अनु० १५० । ४-५) ।
  • सात धरणीधर ऋषियोंमेंसे एक ये भी हैं (अनु० १५० । ४१) ।
  • इनके शापसे सगर-पुत्रोंके दग्ध होनेकी चर्चा (अनु० १५३ । ९) ।
  • (२) भगवान् सूर्यका एक नाम (वन० ३ । २७) ।
  • (३) एक नागराज, जिनका कपिलतीर्थ प्रसिद्ध है । कपिलके उस तीर्थमें स्नान करनेसे सहस्र कपिला-दानका फल होता है (वन० ८५ । ३२) ।
  • (४) भानु (मनु) नामक अग्निके चतुर्थ पुत्र पूर्वोक्त महर्षि कपिलके ही अवतार या स्वरूप हैं (वन० २२१ । २१) ।
  • (५) एक श्रेष्ठ ऋषि, जो शालिहोत्रके पिता थे । इन्होंने उपरिचरके यज्ञकी सदस्यता ग्रहण की थी (शान्ति० ३३६ । ८) ।
  • (६) विश्वामित्रके ब्रह्मवादी पुत्रोंमेंसे एक (अनु० ४४ । ६) ।
  • (७) भगवान् शिवका एक नाम (अनु० १० । १८) ।
  • (८) भगवान् विष्णुका एक नाम (अनु० १४५ । १०; वन० १४१ । १०९) ।

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