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कहोड़

  • (१) महर्षि उद्दालकके शिष्य और जामाता । अष्टावक्रके पिता (वन० १३२ । ३—८) ।
  • इनका उद्दालकका शिष्य होकर विनीत भावसे उनकी परिचर्यामें संलग्न रहना । इनके द्वारा की गयी वेदके महत्त्वको समझकर गुरुका इन्हें शीघ्र ही सम्पूर्ण वेद-शास्त्रोंका ज्ञान कराना और अपनी कन्या सुजाताका इनके साथ विवाह कर देना (वन० १३२ । ९) ।
  • अपने गर्भस्थ बालकद्वारा अपने अध्ययनकी कटु आलोचना सुनकर इनका उसे आठ अङ्गोंसे वक्र होनेका शाप देना (वन० १३२ । १०-११) ।
  • गर्भवती सुजाताका इनसे धनकी याचना करना (वन० १३२ । १५) ।
  • इनका जनकके दरबारमें जाना और वहाँ शास्त्रार्थी पण्डित वन्दिसे हारकर जलमें डुबाया जाना (वन० १३२ । १५) ।
  • इनका जलसे बाहर आना और अष्टावक्रको समझा नदीमें स्नान करनेका आदेश देना (वन० १३४ । ३२—३९) ।
  • (२) इन्द्रकी सभामें विराजमान होनेवाले एक प्राचीन ऋषि (सभा० ७ । १७ के बाद दाक्षिणात्य पाठ) ।
  • हस्तिनापुर जाते हुए श्रीकृष्णसे मार्गमें इनकी भेंट (उद्योग० ८३ । ६४ के बाद दाक्षिणात्य पाठ) ।
  • एक भारतीय जनपद (भीष्म० ९ । ६४) ।

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