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कालकवृक्षीय

  • एक प्राचीन ऋषि, जो इन्द्रकी सभामें विराजमान होते हैं (सभा० ७ । १८) ।
  • इनका एक और कौएको पिंजड़ेमें बाँधकर साथ लेना और कोसलराज क्षेमदर्शीके सारे राज्योंमें वहाँका समाचार जाननेके लिये बार-बार चक्कर लगाना (शान्ति० ८२ । ६-७) ।
  • लोगोंको वायसविद्या सीखनेकी प्रेरणा देते हुए घूमघूमकर राजकर्मचारियोंके दुष्कर्मोंको अपनी आँखों देखना (शान्ति० ८२ । ८) ।
  • सर्वज्ञ काकके कथनका बहाना लेकर उनका समस्त राजकर्मचारियोंकी चोरीका हाल बताना और राजाको सतत सावधान रहनेके लिये उपदेश देना (शान्ति० ८२ । १२-५९, ६१-६७) ।
  • राजा क्षेमदर्शीको इनका वैराग्यपूर्ण उपदेश (शान्ति० १०४ । १२-५४) ।
  • राजा क्षेमदर्शीसे राज्यप्राप्तिके विभिन्न उपायोंका वर्णन (शान्ति० १०५ । २-५) ।
  • क्षेमदर्शीसे संधि करनेके लिये राजा जनकको समझाना (शान्ति० १०६ । १-१९) ।

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