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कालखंज (कालकंज)

  • असुरवंशकी कन्या कालकाके पुत्र कालकंज या कालखंज कहे गये हैं; ये ही कालकेय भी हैं, इनकी संख्या लाखोंके लगभग थी । इनकी मातने तपस्या करके इनके लिये एक विशाल हिरण्यपुर नामक नगर ब्रह्माजीसे प्राप्त किया था, जिसमें ये देवताओंसे अवध्य एवं सुरक्षित ही निवास करते थे (वन० १०३ । ७-१३) ।
  • ये वरुणकी सभामें रहकर उनकी उपासना करते थे (सभा० ९ । १२) ।
  • इनके साथ अर्जुनका युद्ध और उनके द्वारा इन दानवोंका संहार (वन० १०३ अध्याय) ।
  • अर्जुनने इन्द्रकी आज्ञासे इनका वध किया था (विराट० ५९ । २५; विराट० ६१ । २५; उद्योग० ४८ । ३५) ।
  • ये भगवान् विष्णुके चरणोंसे उत्पन्न कहे गये हैं (उद्योग० १०० । ५-६) ।

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