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काश्यप

  • (१) काशिकके एक राजा, जो अम्बा, अम्बिका और अम्बालिकाके पिता थे तथा जिनकी उक्त तीनों कन्याओंका भीष्मने अपहरण किया (आदि० १०२ । ५६, ६४-६५) ।
  • (२) काशिराज जो युधिष्ठिरके समय विद्यमान थे और जिन्होंने राजसूय-यज्ञमें युधिष्ठिरके अभिषेकके समय उन्हें धनुष अर्पण किया था (सभा० ५३ । ९) ।
  • काश्य तथा अन्य राजाओंके दिये हुए धनको युधिष्ठिर जुएमें हार गये (सभा० ५८ । १२) ।
  • इन्हें पाण्डवोंकी ओरसे रण-निमन्त्रण भेजा गया था (उद्योग० ४ । १३) ।
  • काश्यपके पुत्रका नाम अभिभू था (उद्योग० ४७ । ६३; भीष्म० ९३ । १३) ।
  • उत्तम रथी नरश्रेष्ठ काश्य (या काशिराज) भीष्म और द्रोणके समान पराक्रमी थे (उद्योग० १०१ । २२) ।
  • काश्यका नाम 'सेनाबिन्दु' और 'क्रोधहन्ता' था (उद्योग० १०१ । २०-२२) ।
  • पाण्डव-सेनाके महाधनुर्धर शूरवीरौमें काश्य (काशिराज) भी हैं । इन्होंने भी सबके साथ शङ्खनाद किया था (भीष्म० २५ । १७) ।
  • धृतराष्ट्रपुत्र जयके साथ इनका युद्ध (द्रोण० २५ । ४५) ।
  • वसुदानके पुत्रद्वारा काशिराज (कुमार) अभिभूके वधकी चर्चा (कर्ण० ६ । २३-२४) ।
  • (२) एक प्राचीन ऋषि, जो शरशय्यापर पड़े हुए भीष्मजीके पास पधारे थे (शान्ति० ४७ । १०) ।
  • (१) एक सिद्ध मन्त्रवेत्ता ब्राह्मण, जो सर्प-दंशनसे पीड़ित हुए परीक्षित्के प्राण बचानेके लिये आ रहे थे (आदि० ४२ । ३३) ।
  • हस्तिनापुर जाते समय इनका मार्गमें तक्षकसे भेंट और तक्षकके डँसनेसे भस्म हुए वृक्षको मन्त्रबलसे पुनः पूर्ववत् हरा-भरा कर देना (आदि० ४२ । ३३ से ४३ । १० तक) ।
  • इनका तक्षकसे वार्तालाप करना और उससे यथेष्ट धन पाकर लौट जाना (आदि० ५० । १९-२७) ।
  • (२) वसुदेवजीके पुरोहित, जिन्होंने पाण्डवोंके गर्भाधानसे लेकर चूड़ाकरणतक सारे संस्कार कराये (आदि० १२३ । ३१ के बाद दाक्षिणात्य पाठ) ।
  • इनके द्वारा पाण्डुका अन्त्येष्टि-संस्कार सम्पन्न कराया गया (आदि० १२४ । ३१ के बाद दाक्षिणात्य पाठ) ।
  • युधिष्ठिरका आदर करनेवाले ऋषियोंमें ये भी थे (वन० २६ । २३) ।
  • सिद्ध महर्षिके साथ इनका संवाद (आश्व० १६ । १९ से आश्व० १९ । ५३ तक) ।
  • (३) इन्द्रकी सभामें विराजमान होनेवाले एक ऋषि, जो कश्यपके पुत्र हैं (सभा० ७ । १० के बाद दाक्षिणात्य पाठ) ।
  • परम धर्मात्मा काश्यपने पृथुके यज्ञमें सदस्यका पद ग्रहण की थी और अत्रि तथा गौतमके विवादकी सभामें उपस्थित किया था (वन० १८५ । २१) ।
  • कश्यपपुत्र विभाण्डक, राजधर्मा, विश्वावसु, इन्द्र, आदित्य, वसु, अन्य देवता तथा कश्यपकुलमें उत्पन्न समस्त प्रजा कश्यप कही गयी है ।
  • (४) कश्यपपुत्र नामक अग्नि । यह उन पाँच अग्नियों- मेंसे एक है, जिन्होंने तीव्र तपस्या करके पाञ्चजन्यको उत्पन्न किया था (वन० २१० । १-५) ।
  • महत्तर नामक अग्नि, जो कश्यपके अंशसे प्रकट हुए थे, वे भी काश्यप कहलाये । इन्हें पाञ्चजन्यने पितरोंके लिये उत्पन्न किया था (वन० २१० । ५) ।
  • (५) एक ऋषि- कुमार, जो एक वैरेयक रथके प्रवरसे गिरकर आत्महत्या करनेको उद्यत हो गये । शालरूपधारी इन्द्रके साथ उनका संवाद (शान्ति० १८० । ९) ।

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