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कीचक

  • मत्स्यनरेश विराट्का साला और सेनापति एक महाबली वीर, जो द्रौपदीको देखकर काममोहित हो गया था (विराट० १४ । ४-१०; विराट० १५ । ७) ।
  • यह रानी सुदेष्णाका भाई था (विराट० २१ । २१) ।
  • यह 'सूतपुत्र' कहा जाता था (विराट० १५ । ४०) ।
  • कालेय नामक दैत्योंमें सबसे बड़ा जो 'बाण' था, वही कीचकके रूपमें उत्पन्न हुआ था । इसके छोटे भाई भी कालेय ही थे (विराट० १६ अध्यायमें पृष्ठ १८३) ।
  • इसके छोटे भाई एक सौ पाँच थे, जो उपकीचक कहलाते थे । वे सभी भीमसेनके द्वारा मारे गये थे (विराट० २३ । ३२-३३) ।
  • सूतराज कैकयकी बड़ी रानी मालवीके गर्भसे कीचक और इसके भाई उत्पन्न हुए (विराट० १६ अध्यायमें दा० पाठ, पृष्ठ १८३) ।
  • इसका सुदेष्णासे द्रौपदीका परिचय पूछना (विराट० १७ । ७-२२) ।
  • द्रौपदीसे प्रेम-याचना करना (विराट० १४ । ४०-४५) ।
  • द्रौपदीको प्राप्त करनेके लिये इसका सुदेष्णासे अनुरोध (विराट० १५ । २) ।
  • द्रौपदीका केश पकड़ना और उसे लात मारना (विराट० १६ । १०) ।
  • चेष्टाके अनुसार द्रौपदीसे मिलनेके लिये इसका रातके समय नृत्यशालामें जाना (विराट० २२ । ४०) ।
  • वहीं रातहीमें भीमसेनके साथ युद्ध और उनके द्वारा इसका वध (विराट० २२ । ५२-८२) ।
  • इसने अपने जीवनमें चित्रतराज सुशर्माको बारबार हराया था (विराट० २५ और ३० अध्याय) ।

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