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अदिति –

  • दक्षकी पुत्री, कश्यपकी पत्नी तथा द्वादश आदित्योंकी माता (आदि० ६५।११–१६)।
  • नरकासुरद्वारा इनके कुण्डलोंका अपहरण। सत्यभामाजीको इनका वरदान। भगवान् श्रीकृष्णद्वारा इनको दिव्य कुण्डल एवं बहुमूल्य रत्नोंकी भेंट (उद्योग० ४८।८० तथा सभा० ३८।२९ के बाद)।
  • मैनाकपर्वतके कुक्षिक्षेत्रमें स्थित विनशन तीर्थके भीतर देवी अदितिसे पुत्र-प्राप्तिके निमित्त साध्य देवताओंके उद्देश्यसे अन्न ( ब्रह्मौदन) तैयार किया था (वन० १२५।३)।
  • इन्होंने पूरे एक सहस्र वर्षोंतक भगवान् विष्णु (वामन) को गर्भमें धारण किया था (वन० २०१।४२)।
  • आदिके गर्भमें भगवान् विष्णुके सात बार प्रकट होनेकी चर्चा (शान्ति० ३८३।६)।
  • देवताओंकी विजयके उद्देश्यसे अन्न तैयार करनेवाली अदितिका युधका शाप; मृत अण्डकी उत्पत्ति तथा उसीसे प्रकट होनेके कारण श्राद्धदेवकी मार्तण्ड नामसे प्रसिद्धि (शान्ति० ३४२।५६)।
  • देवी अदितिसे एक पैरपर खड़ी रहकर पुत्रके लिये घोर तपस्या की, जिससे भगवान् विष्णु उनके गर्भमें आये (अनु० ८३।२५-२६)।

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