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अद्रिका –

  • एक अप्सरा, जो ब्रह्माके शापसे मत्स्यी होकर यमुनाजीमें रहती थी (आदि० ६३।१८)।
  • यज्ञके द्वारा गिराये गये उपरिचर वसुके वीर्यका इनके द्वारा ग्रहण (आदि० ६३।४९-६०)।
  • इनके पेटसे 'सत्यवती' नामक कन्या एवं 'मत्स्य' नामक पुत्रकी उत्पत्ति ( आदि० ६३ । ६१-६२ )।
  • दो संतानोंको उत्पन्न करके इसका शापसे मुक्त होना ( आदि० ६३ । ६४-६६ )।
  • अर्जुनके जन्मके समय अन्य अप्सराओंके साथ अद्रिका भी स्वर्गसे आयी थी ( आदि० १२३ । ६१ )।
  • अधर्म-समस्त प्राणियोंका विनाश करनेवाला पाप ( पापका अभिमानी पुरुष ) और उसकी उत्पत्तिका कारण ( आदि० ६६ । ५३ )।
  • अधर्मकी पत्नीका नाम निरृति है, इसके तीन 'नैर्ऋत' नामवाले राक्षस पुत्र हैं-भय, महाभय और मृत्यु ( आदि० ६६ । ५५-५५ )।
  • अधर्मके ही अंशसे सम्पत्तिके पुत्र दर्पका प्रादुर्भाव हुआ ( शान्ति० १० । २० )।

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