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कुरु

  • (१) सूर्यकन्या तपतीके गर्भसे सम्राट् संवरणद्वारा उत्पन्न (आदि० ९४ । ४८) ।
  • इनके द्वारा वाहिनीके गर्भसे अश्ववान्, अभिष्यन्त, चैत्ररथ, मुनि एवं जनमेजयका जन्म । इनके नामसे कुरुजाङ्गल देशकी प्रसिद्धि । इनकी तपस्यासे कुरुक्षेत्रका पवित्र होना (आदि० ९४ । ५०-५१) ।
  • इनकी दूसरी पत्नी शुभाङ्गीसे विदुरका जन्म (आदि० ९५ । ३९) ।
  • कुरुक्षेत्रमें मुनि जोतते हुए इनका दक्षक्रे साथ संवाद (शल्य० ५३ । १ । २६-२७) ।
  • कुरुक्षेत्रमें इनके यज्ञ करते समय सरस्वती नदी 'मधुस्रवा' नामसे प्रकट हुई थीं । कुछ व्याख्याकारोंके अनुसार 'ओघवती' नामसे इनका प्राकट्य हुआ था (शल्य० ३८ । २६-२७) ।
  • (२) एक ब्रह्मा-राम-दमसमन्न प्राचीन ऋषि, जो शरशय्यापर पड़े हुए भीष्मजीको देखने आये थे (शान्ति० ४७ । ८) ।

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